शालिनी

 

शालिनी (part-1)

 

मै भी तुमसे प्यार करती हूँ …. लेकिन …. 

रोहन ने कहा लेकिन क्या शालिनी??? अब रोहन जल्द उस लेकिन का मतलब जानना चाहता

था।

 

 

शालिनी एक सावली सुन्दर लड़की है जो की गाँव के सरकारी स्कूल में 2 साल से शिक्षिका थी।

शहर के भीड़ से दूर एक सुन्दर सा गाँव था, जितने सुन्दर यह गाँव था,उतने ही भोले- भाले यहाँ के लोग थे।

बिना स्वार्थ एक-दुसरे के मदद के लिए तत्पर रहते, शालिनी को अब इस जगह से प्यार सा हो गया था।

 

शालिनी एक सरकारी आवास में रहती थी, जिस जगह पर शालिनी रहती वहां सभी  सरकारी कर्मचारी ही रहते थे।

सभी को सरकारी आवास मिला हुआ था,और सरकारी आवास गाव के आखरी छोर में था, वैसे तो यह आवास स्वास्थ्य

कर्मचारी और पशु विभाग का था लेकिन आवास खाली होने के कारण शालिनी को मिल गया था।

 

वैसे भी गाँव में सर्व सुविधा युक्त मकान का मिलना मुश्किल था।

शालिनी अविवाहित थी और बाकी सभी घर में विवाहित जोड़े रहते थे, सभी के बच्चे भी थे।

 

शालिनी का सभी से एक रिश्ता सा हो गया था …. छुट्टी के बाद या रविवार को जब सारी  महिलाये स्वेटर बुनती,

और गप्पे लड़ाती शालिनी भी पहुंच जाया करती और यहाँ रहते-रहते सिलाई , कढाई  और बुनाई में भी माहिर हो गई |

शालिनी का परिवार वहा से बहुत दूर रहता था तो शालिनी का जाना भी बहुत कम हुआ करता था |

साल में एक ही बार क्रिसमस में चली जाया करती थी ,क्रिसमस वो अपने परिवार के साथ ही मनाती थी |

 

पशु विभाग में नए-नए एक डॉक्टर की पोस्टिंग हुई और वो शालिनी के बगल वाले घर में रहने को आ गया।

आज सुबह शालिनी स्कूल के लिए निकल रही थी उस नौजवान से शालिनी की नजर मिली

बहुत ही आकर्षक था, रंग गोरा और लम्बा कद …पहली ही नजर में शालिनी को कुछ हुआ।

 

लेकिन उसे अपने आप पर शर्म आई,और सोचने लगी मै बच्ची नहीं हूँ  25 साल की हो गई हूँ।

दो हफ्ते बीत गए थे, दोनों का पारिचय भी नहीं हुआ।

लेकिन दोनों के घर के बाहर वाली खिड़की से एक-दुसरे की नजर टकरा जाया करती थी।

 

आज शालिनी की नजर उस पर पढ़ी तो वो लड़का मुस्कुरा रहा था |

शालिनी की नजर एकदम से नीचे हो गई और चेहरा शर्म से गुलाबी हो गया |

 

लेकिन उसे हमेशा लगता की वो उस लड़के को देख कर इतना शर्माती क्यों है।

लेकिन अब जैसे खिड़की के पास जाना उसे बहुत अच्छा लगता है।

 

अब रविवार का इंतजार भी होने लगा था, कभी रविवार को वो लड़का नजर नहीं आता तो शालिनी परेशान हो जाती थी,

और एक-एक पल उसकी नजर को उसका इंतजार होता …..

 

अब बगल वाली भाभी भी शालिनी को उस लड़के के नाम से चिढाया करती थी।।।

लेकिन शालिनी गुस्सा नहीं होती, बस शर्म से चहेरा नीचे कर लिया करती |

 

आज भाभी से पता चला उसका नाम रोहन है, और वो भी अविवाहित है, और उसका शहर पास में ही है इसलिए वह

जाते ही रहता है।

 

रोहन को वहा पर आये 5 महिना बीत गया था,

लेकिन शालिनी की उससे नजरो के अलावा शब्दों से बात नहीं हुई थी।

आज फिर रविवार आ गया और रोहन भी घर पर ही था।

आज सुबह बहुत सुहानी हवा चल रही थी।

 

रोहन ने दरवाजा  पूरा खुला रखा था, हवा के झोखे घर के अन्दर तेजी से जा रही थी।

जिसके कारण परदे जोर से पहले आगे फिर पीछे की तरफ आती, जिसे शालिनी अपने खिड़की से देख रही थी।

 

सुबह से अगरबत्ती की खुशबु भी बहुत आ रही थी, रोहन रोज पूजा करता था।

उसके बाद खाना बनाया करता था।

शालिनी ने भी आज बहुत सारे पकवान बनाये थे और अब उसका मन हो रहा था की रोहन के लिए लेकर जाये।

 

बस कशमकश में उलझी थी की जाऊ या नहीं कही देखने वाले उसे गलत नहीं समझें, वैसे भी छोटा जगह था..

किसके घर खाने में क्या बना है इसका सबको खबर रहता था |

लेकिन अब उसने सोच लिया वो जाएगी और आज रोहन से बात भी करेगी ….

 

आज शालिनी ने गुलाबी रंग का सलवार पहन रखा था और उसे हमेशा लगता की वो गुलबी रंग में सुन्दर लगती है और

वो लगती भी थी |

जैसे रोहन के दरवाजे पर पहुंची सामने ही कुर्शी पर रोहन बैठा था, वो किताब पढने में मस्त था उसे शालिनी की आहट

भी महसूस नहीं हुई …

 

कुछ पल तो शालिनी खड़ी  रही लेकिन थोड़ी ही देर बाद उसने दरवाजा खटखटाया और रोहन की नजर ऊपर उठी

शालिनी के लम्बे बाल हवा में उड रहे थे वो बहुत ही खुबसूरत लग रही थी |

 

शालिनी ने धीरे से कहा मै कुछ लाई हूँ,  तुम्हारे लिए ।

रोहन जल्दी से अपने कुर्शी से उठ कर आया और बोला आइये अन्दर …

 

शालिनी अन्दर गई, एक पलंग और पुस्तक के ढेर, दो-चार बर्तन और एक पंखा जो कमरे की ख़ामोशी को तोड़ रही थी |

 

इतने दिनों बाद दोनों ने सामने से अपना परिचय दिया , और ½ घंटे की बातचीत के बाद दोनों फिर से अपने –अपने

काम में रम गए लेकिन शालिनी के दीमाग में रोहन और रोहन के दीमाग में शालिनी ही थी |

 

शालिनी को अब लगने लगा था,… उसकी जिंदगी में शायद प्यार के अंकुर फुट चुके है।

लेकिन साथ में रोहन  की दिल की बात जानने की उत्सुकता भी थी।

कभी-कभी शालिनी को अपने आप से डर भी लगता की, कही वह गलत तो नहीं कर रही कही धोखा न हो जाये।

तो कभी लगता सब सही होगा।

 

आज 14 फ़रवरी था और शालिनी को वैसे किसी बात की उम्मीद तो नहीं थी फिर भी वो खुश थी |

घर का दरवाजा जैसे खोला एक लिफाफा गिरा जिसमे शायद कार्ड था, और गुलाब का फुल …

शालिनी अपना बैग बगल में रख कर तेजी से लिफफा खोलने लगी |

 

कार्ड में लाल रंग से लिखा था I LOVE YOU … शालिनी

आखरी में लिखा था रोहन ..शालिनि का ख़ुशी का ठिकाना नहीं था उसे अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था।

 

शालिनी ख़ुशी से पागल हो रही थी.. आज उसे अपना जवाब जो मिल गया था।

लेकिन रोहन को अब इंतजार था शालिनी के जवाब का ….

 

शालिनी ने आज कुछ नहीं कहा अब उसके दीमाग  में कुछ और ही चल रहा था |

सुबह तैयार होकर सीधे वह रोहन के पास पहुँच गई, लेकिन आज वो ख़ुशी नजर नहीं आ रही थी उसके चेहरे पर जो

हमेशा होती थी।

 

रोहन को लगा शायद शालिनी न कहने आई है, लेकिन शालिनी पहले ही बोल पढ़ी रोहन के कहने के …

मै भी तुमसे प्यार करती हूँ …. लेकिन

रोहन ने कहा लेकिन क्या ??? अब रोहन जल्द उस लेकिन का मतलब जानना चाहता था |

 

शालिनी ने गंभीर होकर कहा  हमारा धर्म अलग है और मै हमेशा के लिए तुम्हारा साथ चाहती हूँ।

 

       

 

To be continued….

 

                                  

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