कोरोना ….की एक मासूम स्टोरी

कोरोना ….की एक मासूम स्टोरी

मेरा एक बेटा है आयु ..२ साल का ..छोटा सा नटखट ,शैतान लेकिन समझदार …या यु कहू की उम्र से कुछ ज्यादा ही समझदार | उसकी समझदारी भरी एक वाकया ,जिसको मै आपके साथ शेयर करने से रोक नहीं पाया |

 

कोरोना से पहले का समय था , मै रोज अपने ऑफिस या किसी भी काम से बहार जाता था , घर में मेरी पत्नी और मेरा बेटा जो उस समय लगभग 1 साल का था | घुटनों के बल चलता, कही भी तीव्र गति से पहुच जाता, किसी भी चीज को जानने और समझने की उत्सुकता बहुत होती थी उसे ,

तो फिर से हम उस कहानी में लौटते है , मै जब भी कही बाहर जाता तो वो मेरे साथ जाने के लिए बहुत रोया करता ,और जैसे ही मै घर वापस आता ,मेरी bike आवाज सुनकर घुटनों के बल दौड़ के गेट के पास आता, दरवाजा तो खोल नहीं पाता लेकिन मुझसे मिलने का ख़ुशी बहुत दीखता था उसके चेहरे पर,    या कह सकते थे है मै भी उतना ही उत्सुक रहता था , मुझे किसी और का दरवाजे के सामने दिखना या खोलना पसनद नहीं था | मेरी पत्नी दरवाजा खोल के किनारे हो जाया करती थी ताकि हम दोनों एक दुसरे को देख सके , नजरो से प्यार होने के बाद मै तुरंतु उसे गोद में उठा लिया करता था और वो पल मेरे लिए सबसे खुबसूरत और अनोखा अहसास होता था ऐसा लगता ये पल यही रुक जाये .

फिर जैसे जीवन में एक विलेन का एंट्री होता है वैसे ही हम दोनों के पिता –पुत्र प्यार में विलेन का एंट्री हुआ | नाम था कोरोना महाशय

अब कही भी जाओ तो घर आने के बाद हाथ धोना ,सनेतिसे करना , कपडा बदलना ये सारी  चीजे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चूका था | इस सब के बाद ही घर में घुसना होता था….

अब मै कही से भी आता घर को …पत्नी दरवाजा खोलती , बेटा दूर बैठ के देखता ,जिद करता आने की दरवाजे के पास , गोद में आने की …लेकिन क्या करे पिता होने के नाते बच्चे की सुरक्षा ज्यादा जरुरी है , नजरो से प्यार होता लेकिन मिअलन नहीं हो पाता,

मै बाहर ही हाथ पैर धोकर वाशरूम जाकर कपडे बदल कर आता, तब तक बेटा घुटनों के बल पीछे –पीछे घूमता ,और उदास हो जाया करता था . बाहार का कुछ छेज भी उसके लिए नहीं ला सकता था .

 

अब बेटा २ साल का है …समझदार हो चूका है ,उसकी ये समझदारी मुझे पसंद नहीं लेकिन जरुरी है ,

 

अब वो चलते हुए आता है , दरवाजा खोलता है और खुद ही दूर चल देता है ,थोडा डांस करता है, नाचता है ,नजरो से दुलार करता है | फिर हम दोनों अपने काम करने के बाद एक दुसरे से मिलता है.

कोरोना ने हर किसी की जींदगी को बदला , किसी के अपने छूटे , कोई अपनों से छूटा , रोजगार ,शहर सब छूटे लगे लेकिन मैने  तो अपने बच्चे का मासूमियत खो दिया , वो अहसास प्यार कहा से वापस लौऊ, उम्र कहा रूकती है जनाब

 

 

 

 

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